बड़कोट। पशुपालन विभाग से जुड़े प्रशिक्षित पैरावेट कर्मियों ने अपनी विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। कर्मियों ने 10 सूत्रीय मांगपत्र के माध्यम से सरकार और पशुपालन विभाग से उनके हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिए जाने की मांग की है।
पैरावेट कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पशुपालकों को पशु चिकित्सा एवं पशु सेवा से जुड़ी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की स्थायी व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
₹25 हजार न्यूनतम मानदेय की मांग
मांगपत्र में पैरावेट कर्मियों को न्यूनतम ₹25,000 प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की मांग प्रमुखता से रखी गई है। इसके साथ ही प्रशिक्षित पैरावेट कर्मियों को पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सालयों एवं पशु सेवा केंद्रों में कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन के पद पर समायोजित करने की मांग की गई है।
कर्मियों ने सभी पैरावेट कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा की सुविधा देने तथा पात्र कर्मियों का उत्तराखंड वेटरनरी काउंसिल में पंजीकरण कराने की भी मांग की है।
सरकारी भर्तियों में प्राथमिकता की मांग
मांगपत्र में कहा गया है कि विभागीय भर्तियों में योग्य एवं प्रशिक्षित पैरावेट कर्मियों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट प्रदान करने की मांग भी रखी गई है।
इन पैरावेट कर्मियों में अध्यक्ष केशवानंद डोभाल, हरदेव सिंह, रविंद्र सिंह, मुकेश, श्यामलाल, सुरेंद्र सिंह, मोहित सिंह रावत, उत्तम चंद, उपेंद्र सिंह, भागमल, विपिन, सतीश रावत, विजय सिंह, सुरेश्वर,सुरेश, ज्ञानचंद और आजाद समेत अन्य पैरावेट कर्मियों के नाम दर्ज हैं।
पैरावेट कर्मियों ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान होने से कर्मियों को राहत मिलने के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा एवं पशु सेवा सुविधाएं भी मिल सकेंगी।

