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हार्ट अटैक के दौरान सीपीआर की जानकारी से छात्रों को किया जागरूक, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश,डॉ. केपी जोशी बोले— युवाओं में बढ़ रहे शुगर और बीपी के मामले, फास्ट फूड व देर रात तक मोबाइल से बनाएं दूरी… पढ़ें खबर।

 

 

 

देहरादून। युवाओं में तेजी से बढ़ रहे शुगर, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी रोगों को देखते हुए चारधाम अस्पताल के निदेशक डॉ. केपी जोशी ने बुधवार को कारगी रोड स्थित सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और आपातकालीन स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण दिया।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. केपी जोशी ने कहा कि आज 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में शुगर, हाई बीपी और हृदय रोगों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसका प्रमुख कारण फास्ट फूड का बढ़ता चलन, अनियमित दिनचर्या, देर रात तक मोबाइल फोन का उपयोग, पर्याप्त नींद न लेना तथा शारीरिक गतिविधियों में कमी को बताया।

 

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि स्वस्थ रहने के लिए फास्ट फूड के बजाय मोटे अनाज और संतुलित भोजन को अपनाएं, प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर योग एवं व्यायाम करें तथा मोबाइल फोन का उपयोग केवल ज्ञान और आवश्यक कार्यों तक सीमित रखें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली ही गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

 

इस अवसर पर फिजिशियन डॉ. सुकृति जोशी ने छात्रों को हार्ट अटैक की स्थिति में प्राथमिक उपचार के रूप में सीपीआर देने की वैज्ञानिक विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की धड़कन रुक जाए या वह अचानक बेहोश हो जाए, तो एंबुलेंस पहुंचने तक लगातार सही तरीके से सीपीआर देना उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने सीपीआर की तकनीक को स्वयं अभ्यास कर सीखा तथा स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न प्रश्न भी पूछे, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तार से उत्तर दिया।

 

विद्यालय के प्रबंधक विपिन बलूनी ने चारधाम अस्पताल की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को स्वास्थ्य, आपातकालीन चिकित्सा और जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी देने वाले ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर सभी विद्यालयों में आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि बच्चे स्वयं जागरूक बनने के साथ-साथ समाज में भी स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश पहुंचा सकें।

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