बड़़कोट।अपर यमुना वन प्रभाग में अफसरों की जिद के चलते आम लोगों में पनप रहा आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा हैं।
गौरतलब है कि राजशाही के समय से काश्तकारों को मिलने वाली फ्री ग्रान्ट लकड़ी और देवदार पीढ़ी के न मिलने से यमुना घाटी की जनता भारी आक्रोशित है। वन विभाग वर्किंग प्लान की स्वीकृति न मिलने का बहाना बना कर काश्तकारों को जलेबी की तरह घुमाने में लगा है। जबकि सूत्रों की माने तो फ्री ग्रान्ट व पीढ़ी से वर्किंग प्लान का कुछ लेना देना नहीं है।। मालूम हो कि वनाच्छादित क्षेत्र अपर यमुना वन प्रभाग के ग्रामीण अपने हक हकूक के लिए अरसे से तरस रहे हैं। हाल यह है कि वन विभाग के चक्कर लगा लगा कर ग्रामीण बेहद परेशान हो गए हैं, जबकि राजशाही के समय से वन महकमा यमुना घाटी के ग्रामीणों को चीड़ के पेड़ का फ्री ग्रान्ट लकड़ी सहित पीढ़ी लकड़ी मुहैय्या करवाती थी परन्तु विगत दो वर्षों से ग्रामीणों को हकहकूक नहीं दिया जा रहा है।
काश्तकार प्रताप रावत, दिनेश सिंह, अवतार सिंह, जगमोहन , जय हो ग्रुप संयोजक सुनील आदि का कहना है कि सन 2021, 2022, 2023 में ग्रामीणों को हक़ हकूक मिला लेकिन विगत दो सालों से काश्तकारों को हकहकूक पर वन विभाग द्वारा कुठाराघात किया जा रहा है। एक तरफ वन विभाग वनों की सुरक्षा के लिए जनजागरूकता अभियान चलवा रहा है, दूसरी तरफ ग्रामीणों के हकहकूक से वंचित कर रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग को चेतावनी देते हुए कहा है अगर जल्द ग्रामीणों के हकहकूक फ्री ग्रान्ट लकड़ी सहित पीढ़ी की स्वीकृति नही दी गई तो सभी गाँव के ग्रामीण आंदोलन को बाध्य हो जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और वन मंत्री को पत्र भेज कर प्रभागीय वनाधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है। इधर प्रभागीय वनाधिकारी रविन्द्र सिंह का कहना है कि राजशाही 1940 के आधार पर वर्किंग प्लान स्वीकृति के बाद फ्री ग्रान्ट लकड़ी दी जाती है। वर्ष 2021-22 और 2022-23 में फ्री ग्रान्ट लकड़ी व पीढ़ी काश्तकारों को दी गयी, उसमें वर्किंग प्लान स्वीकृति की प्रतीक्षा में हुआ। उन्होंने बताया कि भारत सरकार से वर्किंग प्लान में कुछ आपत्ति आयी, जिसे जल्द सही करके भारत सरकार को भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति के बाद काश्तकारों के हकहकूक उपलब्ध कराए जाएंगे।

