देहरादून।
कोरोना ने हमसे बहुत कुछ छीना है। यहाँ तक कि सुकुन् भी और जिंदादिली भी। सब कुछ थम सा गया और जिन्दगी की डोर एक अदृश्य शत्रु ने इतनी कमज़ोर कर दी कि चारो ओर सिर्फ सन्नाटा ही शेष था। इस सन्नाटे को तोड़ने की कोशिश राजधानी देहरादून की अग्रणी नाट्य संस्था मेघदूत द्वारा 12 दिसंबर 2021 को की जा रही है, अपनी अभिनव प्रस्तुति ‘भय बिनु होई न प्रीत’ के माध्यम से।
रविवार 12 दिसंबर को शाम छ्ह बजे से देहरादून टाउन हॉल में आप कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए इस नाटक की प्रस्तुति को देख सकते हैं की सब कुछ थम जाने के बाद भी भारतीय जीवन पद्धति में जीने की आस किस तरह भक्ति और शक्ति के जरिये जगाई जा सकती है।
प्रसिद्ध नाटककार एस. पी. ममगाईं के निर्देशन में प्रस्तुत किया जा रहा यह नाटक ‘भय बिनु होई न प्रीत’ मूलत: गोस्वामी तुलसीदास के रामचरित मानस के पन्चम सोपान सुंदरकांड पर आधारित है और इसमें विनय पत्रिका का समावेश किया गया है।
आधुनिक, पारसी और नौटंकी शैली मिश्रित इस नाटक को लोकरंजन की दृष्टि से गीत, संगीत, और अभिनय का बेजोड़ प्रयास बनाने की कोशिश की गई है। श्री ममगाईं भारतीय चिन्तन के मूल तत्व भक्ति भाव को नाटक का आधार बनाया है। स्वाभविक रूप से नाटक का न सिर्फ उन्होंने निर्देशन किया है बल्कि संवाद भी लिखे हैं। इसके लिए वह एक सशक्त हस्ताक्षर भी माने जाते हैं। नाटक में प्रवेश निशुल्क है, दर्शकों को केवल कोरोना गाइडलाइन का पालन करना होगा। नाटक को संगीत हमेशा की तरह आलोक मलासी दे रहे हैं जबकि गायन में उनका साथ लिली भट्ट देंगी। श्री ममगाईं ने देश, काल और परिस्थितियों के मद्देनजर नाटक की विषयवस्तु के तौर पर गोस्वामी तुलसीदास की रामचरित मानस का यह प्रसंग लिया है ताकि समाज में व्याप्त निराशा के भाव को दूर कर आशा का सन्चार् किया जा सके। उम्मीद है दर्शकों को यह प्रयास पसंद आएगा।
टीम यमुनोत्री Express

