देहरादून | रिपोर्ट: सुनील थपलियाल।उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में विभागीय वाहन के कथित दुरुपयोग, फर्जी यात्राओं के नाम पर भुगतान, पदोन्नति में अनियमितता ,आय से अधिक संपत्ति तथा न्यायालयों के आदेशों के कथित अनुपालन को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। सेवानिवृत्त कर्मचारी अभय कुमार ने यूपीसीएल अधिकारी एच.पी. शर्मा से जुड़े मामलों की जांच की मांग केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), शासन के उच्चाधिकारियों और यूपीसीएल प्रबंधन से की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2015 में विभागीय वाहन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। आरोप है कि विभागीय वाहन का उपयोग उत्तराखंड से बाहर निजी कार्यों के लिए किया गया। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत के साथ संबंधित अनुमति पत्र भी संलग्न किए हैं। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों में विभागीय वाहन से मेरठ और रुड़की जाने की अनुमति का उल्लेख है।
अभय कुमार का आरोप है कि यूपीसीएल में कथित फर्जी यात्राओं के नाम पर भुगतान किया गया तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई। उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2016 से 2026 के बीच कई बार शिकायतें कीं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
एच.पी. शर्मा की पदोन्नति पर भी सवाल
शिकायत में यूपीसीएल अधिकारी एच.पी. शर्मा की पदोन्नति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध पूर्व में विभागीय कार्रवाई और प्रतिकूल प्रविष्टियों से जुड़े मामले होने के बावजूद उन्हें उच्च पद पर पदोन्नत किया गया। उन्होंने पदोन्नति से संबंधित संपूर्ण अभिलेखों की जांच कर नियमों और प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन का मुद्दा
शिकायतकर्ता ने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण और रिकवरी से जुड़े मामलों को भी शिकायत में शामिल किया है। उनका आरोप है कि इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का कथित रूप से उचित अनुपालन नहीं किया गया। उन्होंने संबंधित न्यायालयीन आदेशों, विभागीय अभिलेखों तथा वेतन निर्धारण से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
अभय कुमार ने CVC और संबंधित सक्षम अधिकारियों से शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
मामले में यूपीसीएल के महानिदेशक पी.सी. ध्यानी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं, एच.पी. शर्मा का पक्ष भी प्राप्त नहीं हो सका है। दोनों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

