बड़कोट, उत्तरकाशी/सुनील थपलियाल। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर नौगांव विकासखंड में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम पंचायत कोटि बनाल निवासी सरदार सिंह रावत का आरोप है कि वह वर्ष 2023 से आवास के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जांच में पात्रता संबंधी तथ्य सामने आने के बावजूद उन्हें अब तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया। दूसरी ओर, क्षेत्र में पक्के और लेंटरदार मकान वाले कथित अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिलने के आरोपों ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरदार सिंह रावत द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, उनकी शिकायत पर वर्ष 2023 में जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी। संबंधित जांच आख्या में उल्लेख किया गया कि उनका मुख्य साधन कृषि है, परिवार में पांच सदस्य हैं, रहने के लिए एक कमरा है और आवास निर्माण के लिए निजी भूमि उपलब्ध है। दस्तावेज में यह भी दर्ज है कि आवास पोर्टल खुलने पर उनका जियो-टैग किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके बावजूद, सरदार सिंह का कहना है कि वर्षों बीतने के बाद भी उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक जरूरतमंद और कच्चे घरों में रहने वाले परिवार सरकारी प्रक्रिया में भटक रहे हैं, जबकि पक्के एवं लेंटरदार मकान रखने वाले कुछ लोगों को योजना का लाभ दिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बड़कोट शिविर में भी पीएम आवास की शिकायतों की भरमार
हाल ही में बड़कोट में आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ शिविर में भी प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े मामले प्रमुखता से सामने आए। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के समक्ष कई ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना से वंचित रखने और कथित रूप से अपात्र लोगों को लाभ दिए जाने की शिकायतें रखीं। इन शिकायतों के बाद योजना के लाभार्थियों के चयन और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल और गहरा गए हैं।
सरदार सिंह रावत का मामला भी इसी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। उनका कहना है कि जब विभागीय जांच में उनकी परिस्थितियों का उल्लेख किया जा चुका है, तो उन्हें वर्षों तक योजना के लाभ के लिए क्यों भटकना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार
सरदार सिंह रावत ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा पात्रता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत करने की मांग की है। उन्होंने योजना के तहत लाभार्थियों के चयन की भी पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई है, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को उनका अधिकार मिल सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में पात्रता संबंधी परिस्थितियां पहले ही दर्ज थीं, तो तीन वर्षों से सरदार सिंह रावत को आवास का इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? साथ ही, यदि पक्के मकानों वाले अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिलने की शिकायतें सही हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब और आवासविहीन परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। ऐसे में पात्र लाभार्थियों के वंचित रहने और अपात्रों को लाभ मिलने के आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।

