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उत्तरकाशी बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

हिमालय खतरे में! ऑडेन्स कॉल ट्रेक पर कचरे का अंबार, ग्लेशियरों तक पहुंचा प्लास्टिक और मानव मल, 12 से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर प्रकृति कराह रही है, करोड़ों के साहसिक पर्यटन के बीच कचरा प्रबंधन पूरी तरह फेल…. पढ़ें खबर।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उत्तरकाशी/सुनील थपलियाल

।विश्व के सबसे दुर्गम और रोमांचकारी ट्रेकों में शामिल ऑडेन्स कॉल ट्रेक आज मानव लापरवाही का दर्दनाक चेहरा बनता जा रहा है। जहां कभी बर्फ से ढके ग्लेशियर, दुर्लभ वनस्पतियां और निर्मल प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करते थे, वहीं अब 12 हजार से 18 हजार फीट की ऊंचाई तक प्लास्टिक की बोतलें, टिन के डिब्बे, पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के रैपर और अन्य गैर-जैविक कचरा बिखरा दिखाई दे रहा है। यह दृश्य हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

 

हर वर्ष देश-विदेश से सैकड़ों ट्रेकर्स और अभियान दल ऑडेन्स कॉल की कठिन चढ़ाई को पार करने पहुंचते हैं, लेकिन कई दल अपने पीछे कचरे का ढेर छोड़कर लौट जाते हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और अत्यधिक ऊंचाई के कारण यह कचरा वर्षों तक वहीं पड़ा रहता है। इससे न केवल प्राकृतिक सौंदर्य धूमिल हो रहा है, बल्कि हिमालय के नाजुक पर्यावरण पर भी गहरा संकट मंडरा रहा है।

 

स्थिति तब और अधिक चिंताजनक हो जाती है जब ग्लेशियरों के ऊपर और आसपास खुले में मानव शौच के निशान भी दिखाई देते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक और मानव अपशिष्ट धीरे-धीरे ग्लेशियरों और जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकते हैं। इसका सीधा असर वन्यजीवों, जैव विविधता और भविष्य में लाखों लोगों की जल सुरक्षा पर पड़ सकता है।

 

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन, वन विभाग और ट्रेकिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये के साहसिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन कचरा प्रबंधन के लिए प्रभावी व्यवस्था कहीं नजर नहीं आती। “कैरी इन, कैरी आउट” नीति केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीन पर उसका पालन नहीं हो रहा।

 

पर्यावरणविदों ने मांग की है कि प्रत्येक ट्रेकिंग दल के लिए अपना पूरा कचरा वापस लाना अनिवार्य किया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाए और ट्रेक मार्ग पर नियमित सफाई अभियान चलाए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऑडेन्स कॉल ट्रेक अपनी प्राकृतिक खूबसूरती नहीं, बल्कि कचरे के ढेर और पर्यावरणीय बदहाली के लिए पहचाना जाएगा।

 

हिमालय केवल उत्तराखंड की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे देश की जीवनरेखा है। ऐसे में जिम्मेदार पर्यटन, सख्त निगरानी और प्रभावी कचरा प्रबंधन ही इस अनमोल विरासत को बचाने का एकमात्र रास्ता है।

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