बड़कोट।यमुना माँ के मायके खरशाली (खुशिमठ) में गीठ पट्टी के आराध्य ईष्ट भगवान श्री समेश्वर देव के कपाट शीतकाल के लिए पौराणिक रीति-रिवाजों एवं धार्मिक परम्पराओं के अनुरूप आम श्रद्धालुओं हेतु बंद कर दिए गए। कपाट बंदी का यह पावन आयोजन वैदिक मंत्रोच्चार, देव अनुष्ठान, भजन-कीर्तन एवं लोकनृत्यों के साथ श्रद्धा और आस्था के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
मालूम हो कि वुधवार को भगवान श्री समेश्वर देव का विधि-विधान से पूजन अर्चना के पश्चात देव डोली के साथ पारंपरिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए और भगवान समेश्वर देव शीतकाल के लिए अपनी गद्दी स्थल पर विराजमान हो गए। कपाट बंदी के दौरान मंदिर परिसर में लोक संस्कृति की मनोहारी झलक देखने को मिली, वहीं “जय-जय हो भगवान श्री समेश्वर देवता” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
वुधवार की सुबह से ही मंदिर में पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने देव डोली के सम्मुख अपनी समस्याएं रखीं और आराध्य देव से कुशलक्षेम व समाधान की कामना की। पुजारी मदन मोहन उनियाल ने बताया कि अभिजीत मुहूर्त में भगवान श्री समेश्वर देव के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए हैं। अब आगामी चार माह तक भगवान श्री समेश्वर देव मंदिर के भीतर अपनी गद्दी पीठ पर विराजमान रहेंगे और इस अवधि में आम श्रद्धालुओं के दर्शन संभव नहीं होंगे।
कपाट बंदी के अवसर पर प्रेमबल्लभ उनियाल, रमेश उनियाल, यशपाल राणा, रणवीर राणा, महादेव उनियाल, सुभाष उनियाल, गिरीश उनियाल, प्यारे लाल उनियाल, रूपेश पंवार, विवेक उनियाल, सूरज सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न इस धार्मिक आयोजन को क्षेत्र की आस्था और परंपरा का अनुपम उदाहरण बताया।

