बड़कोट।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बड़कोट में वर्षों से डॉक्टरों के रिक्त पदों को लेकर यमुनाघाटी के लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था पर गहरी चिंता जताते हुए उपजिलाधिकारी बड़कोट के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्काल नियुक्ति की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2015 में सीएचसी बड़कोट के लिए आठ चिकित्सकीय पद स्वीकृत किए गए थे, लेकिन आज तक केवल एक दंत चिकित्सक की ही नियुक्ति हो सकी है। शेष सभी महत्वपूर्ण पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, जिससे बड़कोट, नौगांव, पुरोला सहित पूरी यमुनाघाटी की जनता और यमुनोत्री धाम आने वाले लाखों श्रद्धालु बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।
क्षेत्रवासियों ने कहा कि यमुनोत्री यात्रा का प्रमुख पड़ाव होने के बावजूद अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उत्तरकाशी या देहरादून रेफर करना पड़ता है, जिससे समय पर उपचार न मिलने का खतरा बना रहता है।
ज्ञापन में अस्पताल में 24 घंटे प्रसव सुविधा शुरू करने, आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने, पर्याप्त डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति करने, आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने और इमरजेंसी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
क्षेत्रवासियों ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है, ऐसे में सीएचसी बड़कोट में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जनहित में तत्काल प्रभाव से रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने की मांग की।
इस अवसर पर समाजसेवी अजय रावत, पूर्ण सिंह रावत, व्यापार मंडल महामंत्री सोहन गैरोला, व्यापार मंडल उपाध्यक्ष दिनेश चौहान, नीरज रावत, अवतार सिंह रावत, निशणी प्रधान मनोज चौहान, भरत सिंह, मदन जोशी, निर्मला, ललिता, मीरा, विनीता, गिरीश चौहान सहित दर्जनों क्षेत्रवासी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि जल्द स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हुआ तो क्षेत्र की जनता अपने स्वास्थ्य अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।

