बड़कोट।चारधाम यात्रा के प्रथम प्रमुख तीर्थ धाम यमुनोत्री में इस वर्ष भी सिस्टम की लेटलतीफी भारी पड़ती नजर आ रही है। जुलाई 2024 में आई भीषण आपदा से हुए नुकसान के बाद अब तक स्थायी बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू न होने से आगामी यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं को फिर से परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
आपदा के बाद तात्कालिक राहत और सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन ये कार्य एक सीजन भी नहीं झेल सके। कई स्थानों पर किए गए अस्थायी इंतजाम बह गए, जबकि कुछ संरचनाएं तिरछी या धंस चुकी हैं। इसके बावजूद स्थायी समाधान आज तक जमीन पर उतरता नहीं दिख रहा।
यमुनोत्री धाम की सुरक्षा के लिए शासन द्वारा करीब 18 करोड़ रुपये की बाढ़ सुरक्षा योजना स्वीकृत की गई थी। स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसका शिलान्यास किया और वर्ष 2025 में कपाट खुलने के दौरान यमुनोत्री पहुंचकर आपदा से हुए नुकसान का निरीक्षण भी किया। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि उसी दौरान इस योजना का टेंडर निरस्त हो गया। नतीजतन, कार्य शुरू होना तो दूर, फाइलें ही दफ्तरों में अटकी रहीं।
इस मामले को लेकर पुरोहित समाज और यमुनोत्री मंदिर समिति ने कई बार संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर नाराजगी जाहिर की और बाढ़ सुरक्षा कार्य शीघ्र शुरू करने की मांग उठाई। एक साल बीत जाने के बाद भी किसी तरह के सुरक्षात्मक उपाय न होने पर पुरोहित समाज, मंदिर समिति और चारधाम यात्रा से जुड़े लोगों में भारी रोष है। उनका आरोप है कि शासन-प्रशासन द्वारा यमुनोत्री धाम की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल और सचिव सुनील उनियाल ने बताया कि वे इस संबंध में जिलाधिकारी से भी मिल चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं यमुनोत्री धाम का निरीक्षण कर चुके हैं, इसके बावजूद बाढ़ सुरक्षा कार्यों को अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया गया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि 19 अप्रैल 2026 को यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने जा रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कार्यों का अभी तक कोई अता-पता नहीं है।
स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि यदि समय रहते बाढ़ सुरक्षा कार्य नहीं किए गए, तो बरसात के दौरान फिर से जान-माल का खतरा बना रहेगा और यात्रा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
कोट:
“यमुनोत्री धाम में बाढ़ सुरक्षा कार्य की पत्रावली को कैबिनेट से मंजूरी मिलनी बाकी है। जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है, उसके बाद कार्य शुरू किया जाएगा।”
— संजय राज, अधिक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग उत्तरकाशी

