सुनील थपलियाल उत्तरकाशी।
जनपद उत्तरकाशी में कूड़े के निस्तारण को लेकर पिछले 30 दिनों से चल रहा आंदोलन सोमवार को उस समय अचानक गरमा गया, जब आंदोलन में शामिल राज्य आंदोलनकारी संतोष सेमवाल ने मां गंगा को बचाने के लिए जल समाधि लेने का कदम उठा लिया। संतोष सेमवाल मणिकर्णिका घाट पर गंगा में उतर गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन मौके पर पहुंचा और कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दौरान घाट पर मौजूद लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
गौरतलब है कि उत्तरकाशी मुख्यालय में लंबे समय से कूड़े के ढेर और उसके निस्तारण को लेकर आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि नगर क्षेत्र में जगह-जगह कूड़ा जमा होने से गंगा प्रदूषित हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
राज्य आंदोलनकारी संतोष सेमवाल ने कहा कि जब तक नगरपालिका प्रशासन कूड़े के निस्तारण को लेकर लिखित और समयबद्ध आश्वासन नहीं देता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने साफ कहा कि गंगा की स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
घटना के बाद नगरपालिका अध्यक्ष भूपेंद्र चौहान ने संतोष सेमवाल और आंदोलनकारियों को 30 दिनों के भीतर कूड़े के निस्तारण का आश्वासन दिया। इस पर संतोष सेमवाल ने फिलहाल जल समाधि का निर्णय स्थगित करते हुए घोषणा की कि यदि 30 दिनों के भीतर कूड़े का निस्तारण नहीं हुआ, तो वह दोबारा जल समाधि लेंगे।
इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन और नगरपालिका पर आंदोलनकारियों की मांगें पूरी करने का दबाव और बढ़ गया है।
टीम यमुनोत्री Express

