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लोक संस्कृति:-जौनपुर का ऐतिहासिक मौण मेला,मछलियां पकड़ने अगलाड़ नदी में उमड़ा जौनपुर वासियों का हुजूम

 

अमित नौटियाल
नैनबाग/टिहरी गढ़वाल

 

परम्परागत अगलाड़ मौण मेले का आयोजन धूमधाम से सम्पन हुआ।रविवार को मसूरी से सटे जौनपुर क्षेत्र में अगलाड़ नदी में मछलियां पकड़ने का ऐतिहासिक मौण मेले का आयोजन किया जाता रहा है जिसमें टिमरू की लकड़ी को पीसकर उसका पाउडर बनाया जाता है जिसे नदी में डाला जाता है जिससे मछलियां कुछ देर के लिए मूर्छित हो जाती है और उसके बाद ग्रामीण मछलियों को पकड़ते हैं
जौनपुर में मनाया जाने वाला मौण मेला धूमधाम के साथ मनाया गया इस मौके पर ग्रामीणों ने अगलाड़ नदी में टिमरु से बने पाउडर को नदी में डाल कर मछलियां पकड़ी जहां पर हजारों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने मौण मेले में शिरकत की।
विदित रहे कि जौनपुर का ऐतिहासिक मौण मेला दशकों से आयोजित किया जाता रहा है बताया जाता है कि टिहरी नरेश नरेंद्र शाह ने सन 1876 में इसकी शुरुआत की थी। तत्कालीन टिहरी नरेश ने अगलाड़ नदी में आकर मौण टिमरु का पाउडर डाला था उसके बाद निरंतर यहां मेला आयोजित किया जाता रहा और इसमें राज परिवार के लोग भी शामिल होते थे ।इसी परंपरा को जीवित रखते हुए आज भी जौनपुर के लोगों द्वारा इस मेले का आयोजन किया जाता है और टिमरू से बने पाउडर से मछलियों को पकड़ा जाता है सबसे अधिक मछलियां पकड़ने वाले को पुरस्कार दिया जाता है ।टिमरू के पाउडर से जहां नदी साफ हो जाती है मछलियां भी कुछ देर के लिए मूर्छित होकर फिर से जीवित हो उठती है जाल और कुनियाला से मछलियों को पकड़ा जाता है
इस बारे में जानकारी देते हुए ग्रामीण गोपाल सिंह ने बताया है कि यह मेला दशकों से आयोजित किया जाता रहा है उन्होंने कहा कि इससे जहां आपसी भाईचारा बढ़ता है वहीं इस मेले में हिमाचल, देहरादून ,रवाईं आदि क्षेत्रों से भी लोग यहां मेले में शिरकत करते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से कोरोना काल के दौरान इस मेले का आयोजन नहीं किया गया था लेकिन आज बड़ी संख्या में यहां पर ग्रामीण एकत्रित हुए हैं और मौण मेले का आनंद ले रहे हैं।

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