सुनील थपलियाल
उत्तरकाशी।
तीन दिनों तक हुई बारीश और बे मौसमी बरफवारी से हुए नुकसान की तस्वीरों अब धीरे धीरे सामने आनी शुरू हो गयी है। मोरी विकासखण्ड के बगांण क्षेत्र में बरफवारी से सेब के बगीचों में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला है। कास्तकारों ने मुख्यमन्त्री से सेब के बगीचों में हुए नुकसान का मुआवजा दिये जाने की मांग की है।
मालुम हो कि उत्तरकाशी जनपद में तीन दिनों से हो रही बारीश और बे मौसमी बरफवारी से दर्जनों सेब के बागीचों को तबाह कर दिया । सेब के पेड़ तास के पत्तों की तरह जड़ से उखड गये और फलदार टहनियां टुटकर जमी पर आ गयी । मोरी विकासखण्ड के बंगाण क्षेत्र के डगोलीगांव, माकुड़ी गांव, दुचाणु गांव,किराणुगांव, चुंवा गांव, मौण्डा गावं, बलावट गांव, झोटाड़ी गांव, गोकुल गांव, कलिच गांव के सेब उत्पादकांे ने ओलावृष्टी से सेब के पेड़ों को बचने के लिए जालियां लगायी हुई थी ,ओलावृष्टि ने तो उतना नुकसान नही पहुंचाया परन्तु बेमौसमी बरफवारी ने सेब के पेेड़ जमीजोद कर दिये । टहनिंया टुट गयी जिससे सेब उत्पादकों के सामने रोजीरोटी का संकट गहरा गया । सेब उत्पादक सियाराम नौटियाल, हरदयाल सिंह, उपेन्द्र सिंह चैहान, दिनेश चैहान, मद्दी सिंह , अनिल चैहान का कहना है कि बंगाण क्षेत्र का आपदा पीछा नही छोड़ रही है। दैविक आपदायें लगातार कास्तकारों की कमर तोड़ रहा है। इस वर्ष सेब के उत्पादन की अच्छीखासी उम्मीद थी , सेब के पेड़ों पर बहुत अच्छी फुलवारी आ रखी थी लेकिन बेमौसमी बरफवारी ने सब कुछ नष्ट कर दिया । बगीचों में पेेड़ के पेड़ उखड़ गये , टहनिंया टुट गयी । उन्होने बताया कि इस बार सभी ने बगीचों में बड़ी मेहनत और खर्चा किया हुआ था ,वह भी निकलना असम्भव हो गया है। कास्तकारों ने उत्तराखण्ड सरकार से सभी बगीचों का आंगणन कर मुआवजा दिये जाने की मांग की है।
टीम यमुनोत्री Express

