बड़कोट । पहाड़ में सड़क को विकास की पहली सीढ़ी कहा जाता है, लेकिन यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के यमुनाघाटी स्थित नकोड़ा-कपोला गांव के ग्रामीण आज भी इस बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। यहां सड़क नहीं होने का दर्द उस वक्त फिर सामने आया, जब बीती रात करीब 10 बजे एक महिला की अचानक तबीयत बिगड़ गई। गांव तक सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय खुद ही जुगाड़ की एंबुलेंस बनानी पड़ी। ग्रामीणों ने प्लास्टिक की कुर्सी को लकड़ी के डंडों से बांधकर महिला को उसमें बैठाया और रात के अंधेरे में मोबाइल टॉर्च की रोशनी के सहारे करीब सात किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया।
जानकारी के अनुसार, श्रीमती मीना देवी (पुत्री बलबीर सिंह) की बीती रात अचानक तबीयत खराब हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। लेकिन गांव में सड़क नहीं होने के कारण महिला को कुर्सी पर बैठाकर दुर्गम रास्ते से पैदल सड़क तक लाना पड़ा। इस दौरान ग्रामीण प्रदीप राणा, रोहित, सतपाल, पवन, नवीन, विपिन, खुशपाल, विजयपाल राणा, दीपक, मनवीर सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि नकोड़ा-कपोला में यह कोई पहली घटना नहीं है। हर एक-दो महीने में इस तरह की स्थिति पैदा होती है और बीमार अथवा आपातकालीन स्थिति वाले मरीजों को इसी तरह डंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे कई बार जनप्रतिनिधियों, नेताओं और सरकार के सामने अपनी पीड़ा रख चुके हैं। यहां तक कि सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई बार चुनाव बहिष्कार तक किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
स्थानीय निवासी महाबीर पंवार माही ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब ग्रामीणों को मरीजों को प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठाकर सात किलोमीटर पैदल अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है, तो ऐसे में उत्तराखंड के दशक और विकसित भारत की बातें बेमानी लगती हैं। चुनाव के दौरान नेता गांव पहुंचकर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद ग्रामीणों की समस्याओं को भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं देखकर मन बेहद दुखी होता है। कई बार मरीजों को सड़क तक पहुंचाने में इतनी देर हो जाती है कि रास्ते में ही उनकी जान पर बन आती है। कहा कि यदि ग्रामीणों की सड़क संबंधी समस्या के समाधान के लिए तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीणों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।

