बड़कोट। उत्तरकाशी जिले की महत्वाकांक्षी सिलक्यारा–पौलगांव सुरंग निर्माण परियोजना में वुधवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। बड़कोट साइड से लगभग 900 मीटर अंदर सुरंग की कंक्रीट (शॉटक्रीट) लाइनिंग का एक ब्लॉक अचानक टूटकर गिरने से 22 वर्षीय नरेश गूंज, निवासी झारखंड की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद परियोजना में कार्यरत मजदूरों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने कार्यदायी संस्था पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के समय नरेश सुरंग के भीतर कार्य कर रहा था। इसी दौरान लाइनिंग का एक बड़ा हिस्सा उसके ऊपर आ गिरा। साथी मजदूरों ने तत्काल उसे मलबे से बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी।
घटना के संबंध में नवयुगा कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर रविकांत सिंह ने बताया कि हादसा सुरंग के किसी लूज पोर्शन के कारण नहीं हुआ, बल्कि शॉटक्रीट लाइनिंग का एक ब्लॉक टूटकर गिरने से दुर्घटना हुई। उन्होंने कहा कि परियोजना में सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है तथा मृतक के परिजनों को कंपनी की ओर से बीमा (इंश्योरेंस) के साथ नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए उपजिलाधिकारी बड़कोट को घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने हादसे के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच कराने, कार्यदायी संस्था द्वारा अपनाए जा रहे सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा करने तथा जांच रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को मृतक के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने, सभी आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाएं समयबद्ध ढंग से पूरी करने और सुरंग के भीतर कार्यरत अन्य श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने के भी निर्देश दिए हैं।
इधर, हादसे के बाद मजदूरों में भारी नाराजगी देखने को मिली। मजदूर विकास, दीप रंजन, विवेक सहित अन्य श्रमिकों ने आरोप लगाया कि सुरंग निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि कई बार सुरक्षा संबंधी कमियों की जानकारी प्रबंधन को दी गई, लेकिन आवश्यक सुधार नहीं किए गए, जिसके चलते यह दुखद हादसा हुआ। श्रमिकों ने मांग की कि मृतक नरेश के परिजनों को सम्मानजनक मुआवजा, सभी श्रमिकों का ईपीएफ एवं अन्य श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकार सुनिश्चित किए जाएं तथा सुरक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे कार्य पर वापस नहीं लौटेंगे। वही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से पीएलवी सुनील थपलियाल ने मजदूरों के बीच पहुँचकर विधिक सेवा की जानकारी दी और कम्पनी से उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है, जबकि जिला प्रशासन ने भी घटना की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर जांच शुरू करा दी है। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा और सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

