सुनील थपलियाल
बड़कोट (उत्तरकाशी):
यमुनोत्री उद्गम स्थल से लेकर इलाहाबाद प्रयाग तक यमुना नदी को अविरल, निर्मल और सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से चलाया जा रहा महन्त प्रकाशानंद महाराज का धार्मिक एवं सामाजिक अभियान अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस विशेष संकल्प के तहत यमुना के 108 तटों पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जो अब पूर्णता की ओर अग्रसर है।
इसी क्रम में गुरुवार को 106वीं कथा उत्तराखंड के प्रयाग गगनानी में श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुई। आगामी शुक्रवार से कथा का आयोजन हनुमानचट्टी में किया जाएगा, जबकि 108वीं और अंतिम कथा खरशाली में आयोजित होगी, जहां इस ऐतिहासिक संकल्प का समापन होगा।
महन्त प्रकाशानंद महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि यमुना मैय्या और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता, निर्मलता और अविरलता बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते हम सभी जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन गंभीर समस्या बन सकता है। इसलिए सभी यमुना प्रेमियों को एकजुट होकर इस दिशा में कार्य करना होगा।
उन्होंने यमुनोत्री धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान यमुना नदी में गंदगी न फैलाएं और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण पहलू है।
कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण और विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। साथ ही स्थानीय लोगों से भी प्रयाग गगनानी क्षेत्र को स्वच्छ, सुंदर और अविरल बनाए रखने में सक्रिय सहयोग की अपील की गई।
इस अभियान की एक विशेष पहल के तहत सभी कथा स्थलों पर पंचमुखी हनुमान जी की मूर्तियों की स्थापना भी की जा रही है, जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ संरक्षण के इस संकल्प का प्रतीक बनेंगी।
इस अवसर पर शास्त्री मायाराम शर्मा, अशोक शर्मा, उदय प्रकाश मिश्रा, मुकेश, रामशरण डबराल, गणेश डिमरी सहित दर्जनों श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे।

