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एक्सक्लूसिव टिहरी बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

नागटिब्बा:- श्रीनागदेवता की उत्सव डोली के गद्दिपीठ पर बिराजमान होने पर विशाल भंडारे का आयोजन,सैकड़ो श्रद्धालुओं ने लिया आशिर्वाद, जाने श्रीनाग महिमा,पढ़े पूरी खबर…….

सुनील थपलियाल।
उत्तरकाशी की सीमा से सटे टिहरी के नागटीब्बा इड्वालस्यू के 15 गांव में श्रीनागदेवता की उत्सव डोली के आशिर्वाद भ्रमण के बाद गद्दी स्थल कोट गाँव मे भव्यता से स्वागत के बाद डोली और मूर्ति मन्दिर में विराजमान हो गयी है। अंतिम दिन इसमें लोक संस्कृति (तांदी नृत्य) की झलक भी देखने को मिली। इस दौरान पूरा क्षेत्र ॐ नमः शिवाय ,जय नाग देवता के उदघोष के साथ भक्तिमय के रंग में नजर आया। दूर दूर से पहुँचे सैकड़ो श्रदालु इस महोत्सव के साक्षी बने। ।इधर ग्राम पन्यारसेरी द्वारा श्रीनागदेवता की उत्सव डोली
के गद्दिपीठ पर बिराजमान होने पर विशाल भंडारे का आयोजन कर प्रसाद वितरित किया गया।

गौरतलब है कि उत्त्तरकाशी कि सीमा से सटे टिहरी जनपद के नागटिब्बा क्षेत्र में इड्वालस्यू पट्टी के 15 गॉव श्रीकोट गांव, भटवाड़ी गांव, बसाण गांव, एंदी गांव, बिष्टोंसी गांव, खसौसी गांव, बामण गांव, खासकोटी गांव, घियाकोटी गांव, झंगेरी गांव, घराडा गांव, कोठयूड गांव, आखली गांव, पन्यारसेरी गाँव ,कोट गांव में जहाँ पन्द्रह दिनों तक क्षेत्र के आराध्य ईष्ट भगवान श्री नागदेवता की उत्सव डोली के पहुँचने पर महोत्सव आयोजित हुआ , वही पूरा क्षेत्र भक्तिमय में रंगा हुआ नजर आया।
दरअसल नागटिब्बा इडवालस्यू पट्टी के 15 गांव के बाद गद्दी पीठ मुख्य थान ग्राम कोट गांव में श्री नाग देवता महाराज की उत्सव डोली आशिर्वाद देने के बाद पहुँची जहाँ 15 दिवसीय महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न हो गया। आराध्य इष्टदेव श्री नागदेवता के पुजारी सुमनलाल सेमवाल ने बताया कि नागराज एक संस्कृत शब्द है जो कि नाग तथा राज (राजा) से मिलकर बना है अर्थात नागों का राजा। यह मुख्य रूप से तीन देवताओं हेतु प्रयुक्त होता है – शेषनाग, तक्षक तथा अनंतनाग। शेष, तक्षक तथा अनंत तीनों भाई महर्षि कश्यप, तथा उनकी पत्नी कद्रू के पुत्र थे जो कि सभी नागों के जनक माने जाते हैं।
नागों की पूजा से संतान सुख,धन धान्य,संपन्नता की भी प्राप्ती होती है। नाग लोग सात्विक व ठंडा भोजन ग्रहण करते हैं, इसलिए उन्हें कच्चा दूध दिया जाता है। नाग पंचमी से भगवान कृष्ण और कालिय नाग की लड़ाई भी याद आती है। उन्होंने बताया कि नागटिब्बा और कोट गांव में भगवान श्रीनागदेवता की पूजा अर्चना की जाती है। जहां दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन को पहुँचते है। इन 15 दिनों तक भगवान ने सभी दर्शनार्थियों को अपना आशिर्वाद दिया।
गद्दिपीठ पर बिराजमान होने अवसर पर 15 गांव के ग्रामीण व बाहर से पहुँचे सैकड़ो श्रद्धालु पहुँचे हुए थे।

टीम यमुनोत्री Express

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