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उत्तरकाशी एक्सक्लूसिव बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर हवन के बाद लगाया भंडारा,पढ़े खबर…

सुनील थपलियाल

बड़कोट।, यमुना माँ के मायके खरशाली में तीर्थपुरोहित पवन उनियाल द्वारा अपनी माता जी के स्मृति में करवाई जा रही सप्ताहिक संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा संपन्न हो गई। कथा के समापन पर हवन-यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया। भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया। कथा वाचक
गौलोक धाम के संस्थापक राष्ट्रीय संत श्री गोपाल मणि महाराज जी ने सात दिन तक चली कथा में भक्तों को श्रीमद भागवत कथा की महिमा बताई। महाराज ने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा। उन्होंने कहा कि श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान व वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है।
महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण उद्धव से कहते हैं जब साधक इन्द्रिय, प्राण और मन को अपने वश में करके अपना चित्त मुझमें लगाने लगता है, मेरी धारणा करने लगता है, तब उसके सामने बहुत-सी सिद्धियां उपस्थित होती हैं। 18 प्रकार की सिद्धियों में से आठ सिद्धियां तो मुख्य रुप से भगवान में ही निहित होती है। वेदलक्षणा गौ माता संपूर्ण जगत की जननी है। जिस तरह कहा जाता है कि धर्म की रक्षा करोगे तो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगी, उसी तरह यदि तुम गौ वंश की रक्षा, सेवा करोगे तो पराम्बा जगत जननी गौ माता तुम्हारी रक्षा करेंगी, इसमें तनिक भी संदेह नही है। आज का मानव गौ सेवा से दूर होता जा रहा है, यही हम सभी लोगों एवं राज्य, राष्ट्र के दुखों का कारण है। एक दिन सभी को गौ माता के रक्षार्थ, सेवार्थ आगे आना होगा, तभी जगत का कल्याण होगा। व्यवस्था को बदलना संभव नहीं है और बदलना भी नहीं चाहिए क्योंकि वह विधि का विधान होता है। एक प्रसंग में महाराज ने बताया कि एक बार भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि शस्त्र का संधान कर रहे थे, इस दरम्यान बाण लेने अपनी गृहणी को भेज दिया। तेज धूप के कारण उनका शरीर धूमिल हो गया तो महर्षि ने क्रोधित होकर सूर्य को ही तपने से रोकना चाहा तो भगवान सूर्य स्वयं प्रकट होकर विनती की और तभी से छाता एवं जूता दान की प्रथा शुरु हुई। विपरीत परिस्थति में रक्षा करने की यूति हमें आनी चाहिए। हम सभी को अपने क्षमता के अनुसार गृहस्थ जीवन पर बिना दबाव पड़े वेद लक्षणा गौ माता की सेवा, रक्षा करना चाहिए। इस तरह का सेवा बहुत ही प्रभावकारी होता है।
इस मौके पर आयोजक पवन उनियाल, भागेश्वर, चंद्रशेखर ,सुनील, विवेक उनियाल, सहित सैकड़ों ग्रामीण व श्रदालु मौजूद थे।

टीम यमुनोत्री Express

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