बड़़कोट।रवांई शरदोत्सव संस्कृति एवं पर्यटन विकास मेला अपनी पांचवीं संध्या में संगीत और उल्लास के उच्चतम शिखर पर दिखाई दिया। हिमाचल के लोकप्रिय नाटी किंग कुलदीप शर्मा के मंच पर आते ही हैलीपेड मैदान में मौजूद खचाखच भरी भीड़ उत्साह से झूम उठी। जैसे ही उन्होंने अपनी हिट नाटियों की झड़ी लगाई, दर्शक अपने स्थानों पर टिक ही नहीं पाए और मैदान भर में थिरकते कदमों का मंजर बन गया।
प्रस्तुति के दौरान जब उन्होंने अपनी चर्चित नाटी की पंक्तियाँ—
“छम-छम बाजे पायल मेरी, साथ नाचदी यी दुनिया सारी…”
छेड़ीं, तो पूरा मैदान तालियों और हूटिंग से गूंज उठा। नृत्य करती भीड़ से उठती धूल और चारों ओर फैला उत्साह संध्या को अविस्मरणीय बनाता रहा। नाटी की मधुर लय और ढोल की थाप पर युवा ही नहीं, बुजुर्ग भी ताल मिलाते दिखाई दिए।
इनसे पहले उत्तरकाशी के लोकप्रिय लोकगायक महेंद्र सिंह चौहान ने जौनसारी, जौनपुर और रवांई की मधुर लोकधुनों से वातावरण को सुरमय बना दिया। उनके गीतों ने दर्शकों को इस कदर थिरकाया कि माहौल पहले ही गरमा चुका था, जिसके बाद कुलदीप शर्मा की प्रस्तुति ने उत्सव को चरम पर पहुँचा दिया।
पांचवीं संध्या लोकसंगीत, नाटी की नशीली लय और दर्शकों की अविरल तालियों के बीच एक यादगार रात्रि के रूप में दर्ज हो गई। आयोजक समिति अध्यक्ष विनोद डोभाल और प्रो योगिता डोभाल ने सांस्कृतिक संध्या के कलाकारों को स्मृति चिन्ह व शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर समाजसेवी अजवीन पंवार, कपिल रावत, नरेश चन्द रमोला, अमित सिंगल, कुलदीप राणा सहित हजारों की भीड़ साक्षी बनी।

