Home देश विदेश चमोली:तो क्या विश्व धरोहर फूलों की घाटी नेशनल पार्क में हो सकेगा दुर्लभ हिम तेंदुए का दीदार

चमोली:तो क्या विश्व धरोहर फूलों की घाटी नेशनल पार्क में हो सकेगा दुर्लभ हिम तेंदुए का दीदार

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रिपोर्ट:संजय कुंवर

चमोली जिले की जेव विविधता और वन्यजीवन से भरी फूलों कि घाटी नेशनल पार्क का पैदल ट्रैकरूट इस सीजन में अभी तक बर्फ से लकदक है, घांघरिया बेसकैंप मुख्य गेट से लेकर द्वारीधार,बामण धोर,सियूचंद टिपरा खर्क तक मार्ग पर पुष्पावती नदि के दोनों छोर पर भारी हिमखंड पसरे है,जो पैदल मार्ग को भी कई जगहों पर बाधित किये हुए है,पार्क की वन्य जीवन की सुरक्षा हेतु लगातार पार्क कर्मियों द्वारा लम्बी दूरी की दिन रात की गश्त लगाई जा रही है,वन्य जीव तस्करों की धर पकड़ के लिए पार्क कर्मी बेसकैंप मै डेरा डाले है,इस बीच गश्ती कर्मियों को दुर्लभ हिम तेंदुए(Uncia Unica)के पैरों के पद चिह्न के निशान जैसे दिखाई देने से इस छेत्र की पेट्रोलिंग और तेज़ कर दी गई है,हालांकी अभी ट्रैप कैंमरो की पड़ताल के बाद ही पता चल सकेगा की ये निशान हिम तेंदुआ के ही है,बता दें कि चमोली जिले के उच्चहिमालयी छेत्रों मेन सबसे पहले वर्ष 1985 में हिम तेंदुआ देखा गया था जिसे शोंखर्क के समीप एक बौटनी पर शोध कर रहे यूरोपीय छात्र नें देखा था, वही NDNP नें 2004 तक इस पार्क के स्तनधारीयों प्रजातियों कि गणना में हिमालयी जोंन में करीब 4से 5 हिम तेंदुओ के इसी तरह के प्रमाण मिले थे,गौरतलब है की हिम तेंदुआ बेहद शर्मीला मनोहर प्राणी माना है,जो वर्ल्ड मे 12देशों भारत नेपाल चीन भूटान मंगोलिया रूस अफगानिस्तान पाकिस्तान किरगीस्तान कजाकिस्तान उजबेकि स्तान में पाये जाते है,आम तौर पर ऐ 3500से 4500मीटर की ऊँचाई पर पाये जाते है,जिनका जीवन काल 15से 20वर्ष का माना जाता है, हिम तेंदुए बर्फ से ढके निर्जन बियाबानो मेन अक्सर अकेले देखे जा सकते है, ये जायदा तर दिन मेन सोते है और सुबह और शाम रात को अधिक शिकार करते है,शिकार के लिए ये अपने पूछ की मदद से बिजली की फुर्ती के जैसे छलांग लगाकर अपने शिकार पर झपटती है,चट्टानों पर छलांग लगाने के लिए इनकी पूछ काफी मददगार होती है, हिमालयी ब्लू शीप, मस्क डियर, भरल,आदि इनकी प्रमुख खुराक है, जायदा ऊंचाई पर इनके नेचुरल आवास होने से ये से सुरक्षित रहते है, लेकिन मानव इनका सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है,हिम तेंदुए सर्दी के मौसम मे 1800मीटर तक नीचे आ जाते है,ये अधिक तर एकांत जीवन जीने वाले वन्य जीव है जो जनवरी माह से मार्च माह तक प्रजनन के लिए मादा हिम तेंदुआ के संपर्क में आते है, भारत में भी इनकी संख्या 200से 600के बीच आँकी गई है,इनकी विलुप्ति का मुख्य कारण इनके फर है जिसके लिए वन्य जीव तस्कर इनका शिकार करते है,बता देन की इनके शरीर के फर की बदोलत ये मौसम के आधार पर रंग परिवर्तन करते है गर्मी मेंये खूब सूरत पीले ग्रे रंग के खोल में बदल जाते तो सर्दी में हिम तेंदुआ सफेद मोटी फर वाले बन जाते है, जिससे ये ठंड कि चपेट से बच सके, ओर ये अपने आकार से तीन गुना अधिक वजनी शिकार को दबोच सकते है,
बात उत्तराखण्ड हिमालय की करें तो हिम तेंदुए (स्नो लैपर्ड) का कुनबा यहाँ साल-दर-साल लगातार बढ़ रहा है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन को इस वर्ष वर्ष 2015 मैं चीन सीमा पर स्थित हिमालयी क्षेत्र सुमना, मलारी, फूलों की घाटी और नीती क्षेत्रों में छह हिम तेंदुए विचरण करते दिखे थे।
। पार्क प्रशासन ने हिम तेंदुओं की बढ़ती तादाद पर खुशी जताई है।
वर्षभर हिमालय की गोद में विचरण करने वाला हिम तेंदुआ नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन के सीसीटीवी कैमरों में वर्ष 2010 से लगातार 11,12,13,और 2015 में अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दिया था।
तब नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क और केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने हिम तेंदुओं की साइट ढूंढने के लिए लंबी दूरी की गश्त बढ़ा दी थी। कुछ वर्ष पूर्व केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के ऊखीमठ रेंज में भी वन कर्मियों को स्नो तेंदुए के पद चिन्ह मिले थे।अब फूलो की घाटी में हिम तेंदुआ की हल चल एक बार फिर से वन्य जीव प्रेमियों की खुशी बढ़ा गई है हालांकि अभी इसकी पुख्ता तौर पर जांच ट्रैप केमरों की जांच के बाद ही पता चलेगा की क्या पार्क कर्मियों द्वारा देखे गए पद चिह्न हिम तेंदुआ के ही थे,फ़िलहाल अनुमान के आधार पर बतायी गया है कि इस छेत्र में हिम तेंदुआ हो सकता है, स्नो लेपर्ड का प्रजनन काल का सीजन होने के साथ साथ सर्दियों में भरल,कस्तूरी मृग,आदि का शिकार करने के लिए निचले ईलाको में आने की हैबिट से ये आशंका प्रबल है की कही ये पदचिह्न हिम तेंदुआ के ही हैं।आपदा के बाद इस क्षेत्र में एक हिम तेंदुआ की खाल पकड़े जाने से वन्य जीव प्रेमी काफी दुखी हो गए थे की इस विश्व धरोहर साइट से हिम ब्याग्र की प्रजाती कही लुफ्त हि न हो गई हो लेकिन अब एक बार फिर से यहाँ हिम तेंदुओ की सुगबु गाहट के चलते वन्य जीव प्रेमी भी इंतजार कर रहे की ट्रैप केंमरों में एक झलक ये दुर्लभ वन्यजीव दिख जाये,पार्क प्रशासन भि अब मुश्तेदी से घाटी पर नजर गड़ाये है,कुछ दिन बाद बात साफ हो जाएगी की घाटी मे हिम तेंदुआ वापस लौट आया कि नही फ़िलहाल इंतजार करें।

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