नौगांव । विकासखण्ड के पौराणिक और धार्मिक स्थलों को उत्तराखंड के पर्यटन के मानचित्र पर प्रदर्शित करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।
औद्यानिक समिति के सदस्य संजय थपलियाल ने पर्यटन सचिव और पर्यटन और मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को एक पत्र लिखा है जिसमें 65गांव के आरध्य देव रूद्रेश्वर महादेव मंदिर देवराणा और बाबा बौखनाग मंदिर बौख टिबा के रूपनौल सौड़ को उत्तराखंड के मानचित्र पर प्रदर्शित करने की मांग उठाई गई है।
बताया कि धार्मिक और पौराणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह दोनों स्थान महत्वपूर्ण है और गत वर्ष यहां हजारों श्रद्धालु पंहुचते हैं।
इसके अलावा 4सितम्बर को रूपनौल सौड़ में दूधागाडू़ मेला यानी बटर फेस्टिवल का आयोजन भी हो रहा है, पर्यटन की दृष्टि से यह स्थान महत्वपूर्ण इसलिए है कि यदि उत्तराखंड के मानचित्र पर प्रदर्शित होंगे तो पर्यटन बढेगा और देश प्रदेश से पर्यटक और श्रद्वालु जब पंहुचेगे तो यहां लोगो को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध होंगे।
मालूम हो कि राजधानी देहरादून से यह स्थल लगभग 130किमी दूर हैं और तियां से देवराणा की दूरी पांच किलोमीटर है और कफनौल से रूपनौल सौड़ की दूरी पांच किलोमीटर दूर है,जो पर्यटन की दृष्टि से बेहद रमणीक और बुग्यालों से आच्छादित है,बांज, बुरांश, देवदार,मोरू खर्सू,केदापति,मोरेडां के छायादार वृक्ष यहां के मनमोहक सुंदरता को चार-चांद लगा रहे हैं।
क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और ग्रामीण क्षेत्र को विकसित करने के लिए लगातार वर्षों से रूपनौल सौड़ और देवराणा घाटी को उत्तराखंड के मानचित्र पर प्रदर्शित करने की मांग उठा रहे हैं।

