उत्तरकाशी।उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड की विश्व प्रसिद्ध हरकी दून घाटी आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है। सांकरी, सौड़, ओसला, पवाणी, ढाटमेर, पुर्ती और गंगाड़ समेत कई गांवों के ग्रामीण बरसात के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सड़क संपर्क बाधित होने से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उफनते नदी-नाले, क्षतिग्रस्त मोटर मार्ग और संचार व्यवस्था की कमी ने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
सांकरी-हरकी दून मोटर मार्ग पर कई स्थानों पर नदी-नाले उफान पर बह रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इन्हें पार करने को मजबूर हैं। कई जगह लोग मानव श्रृंखला बनाकर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए, तो समय पर अस्पताल पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता है। उनका दावा है कि कई मरीज इलाज मिलने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ चुके हैं।
क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, संचार और परिवहन सुविधाओं की बदहाली ने लोगों के दैनिक जीवन को बेहद कठिन बना दिया है। अनेक स्थानों पर सड़कें इतनी क्षतिग्रस्त हैं कि वाहन आगे नहीं बढ़ पाते और यात्रियों को बीच रास्ते में वाहन बदलने पड़ते हैं। पहाड़ से गिरते पत्थरों का खतरा, नीचे गहरी खाई और बीच में टूटी सड़क हर सफर को जानलेवा बना देती है।
देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हरकी दून घाटी पर्यटन की अपार संभावनाओं से भरपूर है, लेकिन विडंबना यह है कि आज भी यह क्षेत्र सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि और अधिकारी गांवों तक पहुंचकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही क्षेत्र की समस्याएं भुला दी जाती हैं। वर्षों से विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित कार्य नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है।
स्थानीय ग्रामीण लाल सिंह, कुड़ी, रमेश पंवार और दिनेश सिंह ने प्रशासन एवं सरकार से मांग की है कि हरकी दून घाटी के गांवों को सुरक्षित सड़क, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, संचार सुविधा और आपदा के समय त्वरित राहत व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को हर बरसात में अपनी जान जोखिम में डालकर जीवन न बिताना पड़े।

